देश में अंग्रेजों का शासन था सामाजिक चेतना में कमी थी। समाज अंधविश्वासियों तथा कुरीतियों से घिरी हुई थी। गहोई वैश्य समाज मे स्थानीय पंचायतें कुछ ही संस्थानें संचालित थी। किन्तु इन पंचायतों में सामंजस्य का अभाव था। रीति रिवाजों की भिन्नता से टकराव की स्थिति पैदा होने लगी थी। फलस्वरूप एक क्षेत्र के सजातीय बंधु दूसरे क्षेत्र से अलग हो रहें थे। समाज की यह दशा देखकर मुहाड. (नागपुर) निवासी श्री बलदेव प्रसाद जी मोतेले के मन में यह विचार आया कि समाज के संगठन से ही समाज सुधार हो सकेगा। उन्होने अपने समधी श्री नाथूराम रेजा नरसिंहपूर वालों से अपनी इच्छा व्यक्त की तब उन दोनो दयालू हृदयो ने जहाॅ जहाॅ के पते ठिकाने उन्हें | मालूम थें निमंत्रण पत्र भेजकर गुंसाई बेनेगिरी के बार्ड में दिनांक 07/08/09 तथा 10 अप्रेल 1914 को राष्ट्रीय स्तर की सजातीय बैठक का आयोजन किया । इस बैठक में 32 ग्रामों के विशेषकर महाकौषल बराबर एवं बुंदेलखण्ड क्षेत्र के 84 महानुभाव उपस्थित हुये उक्त चारो दिवसीय कार्यवाही विवरण निम्नानुसार है. -
श्री रघुवप्रसाद जी मरेले करेली गंज जिला नरसिंहपुर वालों ने सर्वसम्मति से सभापति का आसन ग्रहण किया। ईश्वर वंदना के पश्चात श्री नाथूराम जी रेजा ने नरसिंहपूर वालो ने जातीय सुधार पदोंके चार प्रचलित कुप्रथाओं का उदाहरण दे देकर उपस्थित सज्जनो को उत्तेजित किया तथा प्रार्थना की कि वे अपने अपने विचार दिनांक 8 अप्रेल 1914 कों सभा में प्रस्तुत करे ईश्वर वंदना के पश्चात सभा समाप्त की गयी